Rathachakra Udharu De – Moropant (Krishna Karna Conversation)

Moropant (मोरेश्वर रामजी पराडकर) was a very prominent Marathi poet of 17th century. He is considered the last pandit of Marathi poetry. He was also popularly known as Mayur Pandit. He had mastery over Arya vrutta (metre) and Pruthvi chhand. His poetry in Arya vrutta is so Read More …

कुछ शेर

किसे पर्वाह है तेरी ऐ मजलूम ए जमाना हर कोई ख़ुदा बननेकी कश्मकशमें है _____ उठा लो कभी अपने ख़यालोंसे भी पर्दा यह ना हो के पर्दा गिरे तो तनहा हो जाओ _____ ना हुवे जख़्मको इतना भी ना सहलाओ Read More …

उठल्या लहरी काही

उठल्या लहरी काही, गेले धुवून सारे उरल्या खुणा, कधी न पुसण्याजोग्या स्वच्छ निर्मळ, पाण्यासारखा नागवा आणि व्याख्या, दृष्ट न लागण्याजोग्या त्वचेला झाकले हसून, तरी दिसतात खोल जखमा, कधी न झाकण्याजोग्या विसरलो सारे, क्षण, वाटा आणि वळणे प्रत्येक त्या जागा, निवांत Read More …

मुझे याद करना

मुझे याद करना, तूफ़ानके गुजर जाने के बाद वैसेही नहीं रहते, हालात सुधर जाने के बाद तुझे लगा होगा, के नाराज़ हो जाऊँगा तुझसे मैंने छोडी थी उम्मीद, तेरे मुकर जाने के बाद कितने बदलते हैं चेहरे, इंसान भी बदलते Read More …

Vrukshavalli Amha by Sant Tukaram- Hindi Translation

मराठी संतश्रेष्ठ तुकाराम महाराजजी के “वृक्षवल्ली आम्हा सोयरी वनचरे” इस अभंग का हिंदीमें भाषांतर/ अनुवाद। महाराष्ट्रके संतोंकी वाणी व्यापक स्तरपर पहुँचानेका मेरा एक प्रयास। वृक्ष वल्ली आम्हां सोयरीं वनचरें । पक्षी ही सुस्वरें आळविती ।। यह पेड़ लताएँ (बेल) और Read More …