कुछ शेर

कुछ शेर

किसे पर्वाह है तेरी ऐ मजलूम ए जमाना हर कोई ख़ुदा बननेकी कश्मकशमें है _____ उठा लो कभी अपने ख़यालोंसे भी पर्दा यह ना हो के पर्दा गिरे तो तनहा

उठल्या लहरी काही उठल्या लहरी काही

उठल्या लहरी काही, गेले धुवून सारे उरल्या खुणा, कधी न पुसण्याजोग्या स्वच्छ निर्मळ, पाण्यासारखा नागवा आणि व्याख्या, दृष्ट न लागण्याजोग्या त्वचेला झाकले हसून, तरी दिसतात खोल जखमा, कधी न झाकण्याजोग्या

मुझे याद करना

मुझे याद करना, तूफ़ानके गुजर जाने के बाद वैसेही नहीं रहते, हालात सुधर जाने के बाद तुझे लगा होगा, के नाराज़ हो जाऊँगा तुझसे मैंने छोडी थी उम्मीद, तेरे मुकर

Vrukshavalli Amha by Sant Tukaram- Hindi Translation Vrukshavalli Amha by Sant Tukaram- Hindi Translation

मराठी संतश्रेष्ठ तुकाराम महाराजजी के “वृक्षवल्ली आम्हा सोयरी वनचरे” इस अभंग का हिंदीमें भाषांतर/ अनुवाद। महाराष्ट्रके संतोंकी वाणी व्यापक स्तरपर पहुँचानेका मेरा एक प्रयास। वृक्ष वल्ली आम्हां सोयरीं वनचरें ।

Game of Response Game of Response

In our day to day job, we communicate on various things. On various occasions, we try to formulate the reply. It is true that we choose certain words in certain

Stagnate Disintegrate OR Grow Stagnate Disintegrate OR Grow

“You can Stagnate or Grow” a quote by Allen Page a legendary Americal Football player. I gathered this quote from a very famous Football show ‘A Football Life’. Honestly, it shuffled

Spring boot with Docker

Nowadays there is a lot of buzz about microservices, spring boot, and docker. Today I am going to explain how to deploy a spring boot application inside Docker container. Before

जिम्मेदारी जिम्मेदारी

मैं जानता हूँ मेरे अल्फाजके कोई मायने नहीं है बस के खुदाने शायर बना दिया है जिम्मेदारी है आफताब नहीं हूँ पर चिंगारी तो बन चुका हूँ मैं कभी जलना

Words Coined by Swatantryaveer Savarkar Words Coined by Swatantryaveer Savarkar

Swatantryaveer Savarkar ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ born on 28 May 1883 was not only a freedom fighter but also, a visionary leader, historian, poet, writer, editor. He was very much passionate and learned

शहरोंमें मरकर जीने वाले शहरोंमें मरकर जीने वाले

शहरोंमें मरकर जीने वाले तुने देखा ही क्या? जिंदगीका मातम करने वाली रुदालियॉं देख तुझे क्या पता न हुवे जुल्म़पे रोनेकी लज्जत? बस तेरी मेहनतपे जलनेवालोंकी गालीयॉं देख शहरमें कहाँ

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