Day: October 26, 2015

गुजरा दिन

गुजरा भी तो क्या गुजरा यह दिन सतानेवाली रात भी महबूबा लग रही है कोई क्या समझे मेरे दिल पे क्या गुजरी है धुप में जलके राख होती तो बेहतर

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