जिम्मेदारी

मैं जानता हूँ मेरे अल्फाजके कोई मायने नहीं है बस के खुदाने शायर बना दिया है जिम्मेदारी है आफताब नहीं हूँ पर चिंगारी तो बन चुका हूँ मैं कभी जलना है तो कभी जलाना है जिम्मेदारी है हर पेड़ जानता Read More …

शहरोंमें मरकर जीने वाले

शहरोंमें मरकर जीने वाले तुने देखा ही क्या? जिंदगीका मातम करने वाली रुदालियॉं देख तुझे क्या पता न हुवे जुल्म़पे रोनेकी लज्जत? बस तेरी मेहनतपे जलनेवालोंकी गालीयॉं देख शहरमें कहाँ है मुशक्कत आसान है सबकुछ मुश्क़िलोंपे रोनेवालोँ को मिली तालीयाँ Read More …