Category :Poetry

कुछ शेर

किसे पर्वाह है तेरी ऐ मजलूम ए जमाना हर कोई ख़ुदा बननेकी कश्मकशमें है _____ उठा लो कभी अपने ख़यालोंसे भी पर्दा यह ना हो के पर्दा गिरे तो तनहा

उठल्या लहरी काही

उठल्या लहरी काही, गेले धुवून सारे उरल्या खुणा, कधी न पुसण्याजोग्या स्वच्छ निर्मळ, पाण्यासारखा नागवा आणि व्याख्या, दृष्ट न लागण्याजोग्या त्वचेला झाकले हसून, तरी दिसतात खोल जखमा, कधी न झाकण्याजोग्या

मुझे याद करना

मुझे याद करना, तूफ़ानके गुजर जाने के बाद वैसेही नहीं रहते, हालात सुधर जाने के बाद तुझे लगा होगा, के नाराज़ हो जाऊँगा तुझसे मैंने छोडी थी उम्मीद, तेरे मुकर

जिम्मेदारी

मैं जानता हूँ मेरे अल्फाजके कोई मायने नहीं है बस के खुदाने शायर बना दिया है जिम्मेदारी है आफताब नहीं हूँ पर चिंगारी तो बन चुका हूँ मैं कभी जलना

शहरोंमें मरकर जीने वाले

शहरोंमें मरकर जीने वाले तुने देखा ही क्या? जिंदगीका मातम करने वाली रुदालियॉं देख तुझे क्या पता न हुवे जुल्म़पे रोनेकी लज्जत? बस तेरी मेहनतपे जलनेवालोंकी गालीयॉं देख शहरमें कहाँ

Whenever I Try To Walk

Every time I try to walk I hit another roadblock There is always a new wall And a sergeant holding a clock I obey the orders I go till the

The destructing clouds .. I know you can’t

The destructing clouds Don’t bother me anymore For I am neither a tree Nor a ship tied on a shore Do not thunder in vain If you think I fear

The Truth

True colors never fade They find some way To come to the skin When the truth sees the day I am not a preacher Neither I am a saint Carrying

त्यासी भीती गा कशाची

पांडुरंग हो पाठीराखा रखुमाई माय जयाची त्यासी भीती गा कशाची त्यासी भीती गा कशाची आम्हा ना ठावे गाव कूळ ना हो विषयाची जाण सत्य वाणी हो जयाची त्यासी भीती गा

आई

जेव्हा कधी मी अशा आईला बघतो की तिची ईच्छा असूनही तिचं बाळ पुढे जाऊ शकत नाही. त्या आईला काय वाटत असेल? कित्येकदा मी हेही पाहिलंय की मुलगा किंवा मुलगी दिव्यांग

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