Category : Poetry

The destructing clouds .. I know you can’t The destructing clouds .. I know you can’t

The destructing clouds Don’t bother me anymore For I am neither a tree Nor a ship tied on a shore Do not thunder in vain If you think I fear

The Truth The Truth

True colors never fade They find some way To come to the skin When the truth sees the day I am not a preacher Neither I am a saint Carrying

त्यासी भीती गा कशाची त्यासी भीती गा कशाची

पांडुरंग हो पाठीराखा रखुमाई माय जयाची त्यासी भीती गा कशाची त्यासी भीती गा कशाची आम्हा ना ठावे गाव कूळ ना हो विषयाची जाण सत्य वाणी हो जयाची त्यासी भीती गा

आई आई

जेव्हा कधी मी अशा आईला बघतो की तिची ईच्छा असूनही तिचं बाळ पुढे जाऊ शकत नाही. त्या आईला काय वाटत असेल? कित्येकदा मी हेही पाहिलंय की मुलगा किंवा मुलगी दिव्यांग

A Place Called Nowhere

‘Got a place to go called Nowhere Was easier less bloody to go there All I had to do was to be true shook to core they replied closed doors

तुम तो नहीं थे बेवफ़ा तुम तो नहीं थे बेवफ़ा

हजार तीर चुभे हैं दिलमें एक और सही खूँ तो बचा जितना था उतना ही बहेगा ! हर कतरा कहेगा तुम तो नहीं थे बेवफ़ा .. तुम तो नहीं थे

गुजरा दिन गुजरा दिन

गुजरा भी तो क्या गुजरा यह दिन सतानेवाली रात भी महबूबा लग रही है कोई क्या समझे मेरे दिल पे क्या गुजरी है धुप में जलके राख होती तो बेहतर

बेवकुफ़ियाँ बेवकुफ़ियाँ

वह बेवकुफ़ियाँ ही हैं जिन्होंने जीना सिखाया वरना सही करते करते कब के बिगड़ जाते हम धुपमें सुलगते हुवे सीखा ख़्वाबोंको सींचना वरना बारिश याद करते कब के उजड़ जाते

सूरज को ढलना था सूरज को ढलना था

सूरज को ढलना था सो ढल गया आज फिर एक मौसम बदल गया पंछियोंका बसेरा भी क्या बसेरा पंछी ऊब गया सो निकल गया ख़्वाब ख़त्म हो जाए तो पूरा

अब तू ही अब तू ही

अब तू ही छोड़ चली जा यादोंको वरना मुश्किल है तुझे भूल जाना या तो एक बार दिलकी राख कर जा क्यों है तुझे उसे रोज रोज जलाना दवा बता