Category :Hindi/Urdu Poetry

कहानी

उठी हैं पलकें, ख़त्म है कहानी अंगड़ाई ले रही है, फुलोंकी रानी कहानी थी एक सहजादेकी उतरा था जो बादलोंसे ढूंढ रहा था, सपनोंकी रानी हर डगर हर पल सालोंसे

यह दुनिया

यह दुनिया छोटी है गोल है सब झूठ है सब झूठ है ऐसा ना होता तो कभी ना कभी तो वो डगर आती जिसपर तुम आँखे बिछाए खड़ी होती हो!

इश्क़ होनेसे पहले

नरम होठोंसे कभी कहती है कुछ चमकती है बिजली जैसे कभी ख़ामोश होती है फ़िरभी अब मैं सब समझने लगा हूँ फिरता था सुलझाते सवाल सारे इश्क़ होनेसे पहले और

तलाश

मेरी उम्रभर की तलाश थी एक पलमें तुने मिला दिया एक नजरमें बरसों बिछड़े दिलसे दिलको मिला दिया तू न जाने तूने है क्या किया ख़्वाब जिंदगीसे मिला दिया तुझसे

पधारो नी बालमवा

पधारो नी बालमवा मनवामें मारो तो घुँघट खोलूँ तोसे बोलूँ सावरा छब तोरी कनखियोंसे तोलूँ पधारो नी बालमवा अंगनामे मारो तो दीप जलाऊँ तोसे खिलाऊँ हाथोंसे अपने तोरी नजर उतार

सारे चिराग

सारे चिराग ए मुहब्बत जलाए रखिये उनका इस गलीसे गुजरने का वक़्त है ख़्वाबोँसे पलकोंका परदा उठाए रखिये उनका इन आँखोंमे बसरने का वक़्त है हवा महसूस करे है उसे

पी जो नहीं

जी करता है गोदमें तेरे सर रख कर सो लूँ बरसो बादल रोका है सब आजही मैं रो लूँ पी जो नहीं तो कैसा दरपन कैसे ये दिन रैन तन

इस तूफ़ान ने (शेर)

इस तूफ़ान ने रुकना भी है या नहीं ? ख़ुशीके आँसूभी बह गए.. तिनको तिनको के होते हैं आशियाने सारे के सारे ढह गए

ख़बर (शेर)

सैय्याँ न ले ख़बर, दिल पल पल कारे बादल रोय जब जब देखूँ सूना आँगन, रैन काली नागन होय

मज़ा (शेर)

यह मज़ा भी कुछ और है तीर जब दिख रहा हो, फासले मिटाते हुवे बस उनसे कहो जब तीर चलाना मुस्कुराना, कुछ दर्द कम हो जाए

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