Category :Hindi/Urdu Poetry

कुछ राह चलते मुसाफ़िर..

कल रात चाँदभी अकेला था जाने किसकी राह देख रहा था लग रहा था के यह रात ऐसेही बीत जाएगी कुछ राह चलते मुसाफ़िर घर आए तब मैं यादोंमे कुछ

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