Category : Punjabi Poetry

मन होया जे फ़कीर मन होया जे फ़कीर

मन होया जे फ़कीर ते किथ्थों कासी मक्का ? आँख जांदी ओथे मैनूँ यारही जगविच दिखदा .. मन होया जे फ़कीर मन तुझबिन सुखना पाई एक तू न मिलेया तेरे