इल्जाम

इन चाँद सितारोंने भी
अजीब मज़ाक करना शुरू किया है |

हर रोज़ मैं झाँक लेता हूँ आसमाँ को
के कभी तो इनायत नसीब हो

वे तो निकल पड़ते हैं अपनेही मस्ती मैं
कभी इस छोर से कभी उस छोर से
अपने ही धुंद मैं मस्त
अब तो तकदीरें कुचलना शुरू किया है |

दोस्त कहते हैं अफ़सोस न करो
यह तो ऐसेही दिन हैं, निकल जायेंगे
मैं भी तो इसीकी राह देख रहा हूँ
और रातोंने आहिस्ता गुजरना शुरू किया है |

कई मसलोंके हल यूँही मिल जाते है
जिनका इल्म इस दुनिया को नहीं
मिले हुवे हर जवाब पर
जमाने ने सवाल उठाना शुरू किया है |

कुछ लोग कहते हैं की
मेरी तारीख़ का मैं ही जिम्मेदार हूँ
मैं पूछता हूँ
की इस इल्जामातका सिलसिला किसने शुरू किया है ?

Rolla, MO (US)

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