इल्जाम

इन चाँद सितारोंने भी अजीब मज़ाक करना शुरू किया है | हर रोज़ मैं झाँक लेता हूँ आसमाँ को के कभी तो इनायत नसीब हो वे तो निकल पड़ते हैं अपनेही मस्ती मैं कभी इस छोर से कभी उस छोर Read More …

तकदीर

ये कैसा मज़ाक है तकदीर का मैं कही मेरा दिल कहीं .. ईन आँखोंसे हुवे है जख्म जो छुपते नही भर जाते भी नही .. न जाने कैसे ये भूल हुई मेरी दुनिया कहीं तेरा हुस्न कहीं यह बला है Read More …

एक ऐसा शहर..

अगर मैं कोई जादुगर होता हर एक पल को बुलबुला बना देता ख़त्म हो जाते कुछ लम्होंमें फिर कभी न आते यादोंमे याद आती भी तो हर याद को कश्ती बनाके पानीमे बहा देता फिर कभी ना मिलने के लिए Read More …

कुछ राह चलते मुसाफ़िर..

कल रात चाँदभी अकेला था जाने किसकी राह देख रहा था लग रहा था के यह रात ऐसेही बीत जाएगी कुछ राह चलते मुसाफ़िर घर आए तब मैं यादोंमे कुछ तस्वीरें ढूँढ रहा था उनको मैंने ना रोका ना टोका Read More …