राही सुनले

दिल तो एक मलंग है
बादलोंका पलंग है
सींचो सपने, चाहे जितने
ना मिटनेवाला रंग है
उड़ान भर
आसमानसे भी आगे तक
मुडके ना देख
यह ना डोरिसे बंधा पतंग है
अब ना बहा तू
यह पानी मिलता नासिबसे
रोनेवालोंपे
यह दुनिया जरासी तंग है
ओ राही सुनले
तू ढूंढ ना किसी और को
करम है तुझपे
खुदका खुदको जो संग है

 

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